स्वच्छ जल व पुनर्नवीकरणीय ऊर्जा के लिए अवांतर प्रौद्योगिकी तलाश में समुद्रीय संपदा का दोहन संबंधी दल का मुख्य संकेन्द्रण क्षेत्र है । फिलहाल यह दल तीन खास क्षेत्रों में क्रियाशील है । कम तापमान औष्णिक विलवणीकरण (एल.टी.टी.डी) पद्धति द्वारा स्वच्छ जल का उत्पादन और दो विशिष्ट एवं विभिन्न पद्धति द्वारा अर्थात् उष्ण ऊर्जा परिवर्तन और तरंग ऊर्जा द्वारा ऊर्जा उत्पादन ।
एल.टी.टी.डी पद्धति द्वारा विलवणीकरण
निम्न तापमान उष्ण विलवणीकरण में गहराई में अधिकता के होते-होते समुद्री जल तापमान में विभेदक स्थिति की धारणा है । जिससे कम तापमान में गुन-गुन गर्म पानी को बाष्पीकृत करके परिणामी बाष्प को गहन सागर ठंडे जल में जमाव स्थिति लाना एक छोटे प्रयोगशाला आधारित रूप में जो प्रारंभित होकर जो पांच एम 2 दक्षता परिमापन नमूने में था । उससे दल ने सफल रूप में एक 100 एम 2 प्रतिदिन दक्षता वाले भू आधारित संयंत्र को कवरट्टी में चालू किया और एक हजार एम 2 प्रतिदिन दक्षता वाले प्लवणशील नौकाधारित विलवणीकरण संयंत्र को चेन्नै तटीय पार्श्व प्रदेश में आरंभ किया है ।
दल ने उन पावर संयंत्रों के लिए जिनमें बराबर नैरन्तरिकता से संयंत्र से गरम जल निकलता रहता है । वहां भी एल.टी.डी पद्धति को अपनाया है । एक प्रदर्शनात्मक संयंत्र उत्तर चेन्नै ऊष्ण पावर स्टेशन में लगाया गया है ।
कवरट्टी संयंत्र की सफलता के पश्चात् लक्षद्वीप प्रशासन ने वहां के अनरोट जगह अगत्ती और मिनिकाय में समरूप समस्थिति द्वीपाधारित संयंत्रों को स्थापित करने के लिए रा.स.प्रौ.स के पास पहुंचे इन संयंत्रों को शीघ्र ही पूर्णन होने पर चालू किया जाएगा ।
तरंग ऊर्जा परिवर्तन
यह दल सामुद्रिक आधार के अन्य पुनर्नवीकरणीय ऊर्जा योजनाओं पर भी कार्य कर रहा है । और दल ने विलिंजम भारत में एक सर्वप्रथमत: तरंग उर्जस्वित विलवणीकरण संयंत्र को चालू किया है । दुनिया में क्रियाशील बहुत कम तरंग ऊर्जा संयंत्रों में यह भी एक है । इस संयंत्र से उत्पादित ऊर्जा दस यंत्रीय प्रतिदिन विलवणीकरण संयंत्र में उल्टे परिवर्तन चक्र को (रिवर्स आस्मोसिस) चलाने के लिए काम में लाया जाता है ताकि स्थानीय मछली पकड़नेवाले समुदायों की आवश्यकताओं को पूर्त किया जा सके । पिछले दस वर्षों से क्रियाशील, विद्यमान इसके कर्मोन्मुख स्वरूप में स्पदंनशील जलस्तंभ द्वारा चालित टर्बाइन भी है । इस संयंत्र संकुलने के साथ पहले जो प्रयोग किये गये उनसे नैरंतरिक तंतु स्वरूप कूब टर्बाइन नमूना और भेदात्मक तंतु स्वरूप कूप टर्बाइन में पहले प्रयोग किये गये ये दल फिलहाल एक प्लवनशील तरंग ऊर्जा आधारित उपकरण का उपयोग सुदूरस्थ टापुओं में संभावी चालन के लिए ध्यानशील है । ऐसा एक उपकरण पीछे की ओर मुड़नेवाला झुकाव अभिगृहीत उत्फुल्लक में फिलहाल स्थापित हो रहा है और रा.म.प्रौ.सं. में प्रस्तावित और परीक्षणोन्मुख है ।
सामुद्रिक ताप ऊर्जा परिवर्तन
ओ.टी.ई.सी. ने सामुद्रिक ऊष्ण ग्रेडिएण्ट को चालू करके एक समुचित शीतकारक को रैकिंग साइकिल में काम में लाकर बिजली का उत्पादन कर रहा है (वर्तमान पृष्ठ के साथ एक संपर्क जोड़ लें) अपने विलवणीकरण कार्यक्रम की सफलता पर आधारित कर दल ने सामुद्रिक ऊष्ण ऊर्जा परिवर्तन (ओ.टी.ई.सी) को और अधिक क्रियाशीलता से चालू रखने की योजना बनाई है ताकि विलवणीकरण संयंत्र आत्मपूरित हो जाये । रा.स.प्रौ.स. ने अपने द्वीपगत विलवणीकरण संयंत्रों में से एक में ओ.टी.ई.सी. मोड्यूल को स्थापित करने का काम शुरू कर दिया हे ।
ऊर्जा और स्वच्छ जल
यह कार्यक्रम पुनर्नवीकरण ऊर्जा को प्राप्त करने और समुद्र से स्वच्छ जल प्रजनन कार्य को क्रियाशील करने के लिए प्रोद्योगिकी के विकास पर यह कार्यक्रम चलेगा । एक छोटी दर के पीछे की ओर मुड़नेवाला झुकाव अभिगृहीत उत्फुल्लक में फिलहाल स्थापित हो रहा है । इसे बनाकर उसका अध्ययन किया गया और उसके क्षेत्रीय परीक्षण क्रियाशील हे । रा.स.प्रौ.स. में कवरट्टी टापू में प्रतिदिन एक लाख लीटर क्षमता वाले विलवणीकरण संयंत्र को सफल रूप में और एक मिलियन लीटर प्रतिदिन नौका आरोपित प्रदर्शनात्मक रूप वाले एन.टी.टी.डी. संयंत्र को भी शुरू कर दिया है । एल.टी.टी.जी पावर संयंत्रों के शीतल जल निष्कासन क्रम में भी उपयोगी है । जहां इस डिग्री सेंटीग्रेड तक तापमान की भेदात्मक स्थिति विद्यमान है ऐसे प्रयोगात्मक क्षय पदार्थ उष्णन विलवणीकरण संयंत्र उत्तर चेन्नै ताप विद्युत घर में लगाया गया है ।
उद्देश्य
2 से 3 लाख लीटर प्रतिदिन स्वच्छ जल को कम तापमान औष्णिक विलवणीकरण प्रौद्योगिकी द्वारा ऊष्ण पावर संयंत्र में से निकलने वाले क्षयात्मक उष्णता को काम में लाना ।
ओ.टी.ई.सी/ तरंग ऊर्जा से एल.टी.टी.डी संयंत्र के लिए टरबाइनविकसित करना या छोटे भारों में काम करना या तरंग ऊर्जा संयंत्रों की दक्षता को बढ़ाना ।
विलवणीकरण और ऊर्जा परिवर्तन के लिए घटकों पर सैद्धांतिक व प्रयोगात्मक अध्ययन
पावर भारों को छोटी दर वाली उल्टी आस्मोसिस की तरह मानकर एक प्लवणशील तरंग ऊर्जस्वित उपकरण को लगाना या छोटे द्वीपों के प्रकाशात्मक आवश्यकताओं को पूरा करना ।
घटकों के क्रियाशीलता का उच्चांशीकृत करके सैद्धांतिक प्रायोगिक और क्षेत्रीय विवरणों का प्रजनन और पुनर्नवीकरणीय ऊर्जा के निचूषण के वाणिज्यिकरण की तरफ बढ़ना और साथ-साथ स्वच्छ जल तथा और विलवणीकरण का लाभ उठाना ।
योग्यता सिद्ध उद्योगों को पहचानना ताकि एल.टी.टी.डी. संयंत्र को टापुओं में पावर प्लांटों में प्लवनशील जलपोतों में लगाया जा सके ।
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